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मिशन 32 प्रतिशत : वन विस्तार की ओर बढ़ते कदम

शिमला। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में एक दूरदर्शी और महत्त्वाकांक्षी पहल के रूप में ‘मिशन 32 प्रतिशतÓ की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में इस मिशन के तहत वर्ष 2030 तक राज्य के वन आवरण को 29.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह निर्णय ”हिमाचल को हरित हिमालय राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा निर्णय हैÓÓ और इससे जैव विविधता बढ़ेगी। यह लक्ष्य केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और सतत विकास सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

हिमाचल में वनावरण को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने गत तीन वर्षों में कई अभिनव पहल की हैं, जो वन विस्तार, संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को एकीकृत करती हैं। इनमें मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इस योजना का उद्देश्य बंजर और अनुपयोगी पहाडिय़ों को हरित आवरण में बदलना है। इस योजना के पहले वर्ष में ही लगभग 600 हेक्टेयर बंजर भूमि पर पौधरोपण किया जा चुका है। इस योजना के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से वन भूमि पर पौधरोपण किया जा रहा है, जिसमें 60 प्रतिशत पौधे फलदार प्रजातियों के शामिल हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए भविष्य में आय के स्रोत भी सृजित हो रहे हैं।

इसी क्रम में राजीव गांधी वन संवर्धन योजना वन क्षेत्र के पुनर्जीवन की दिशा में एक मजबूत कदम है। इस योजना के तहत वन भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है और पौधों की देखभाल के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। लोगों और संस्थाओं को प्रति हेक्टेयर एक लाख 20 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण और जीवितता दर सुनिश्चित की जा सके।

सरकार ने हरित विकास को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए ग्रीन एडॉप्शन योजना भी शुरू की है। इस योजना के तहत निजी उद्यम, कंपनियां और गैर-सरकारी संगठन बंजर वन भूमि को गोद लेकर वहां पौधरोपण और संरक्षण कार्य करेंगे। यह पहल कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी को प्रोत्साहन प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर रही है। इससे सरकारी संसाधनों पर निर्भरता कम होती है और बड़े स्तर पर हरित परियोजनाओं को गति मिलती है। इन सभी पहलों का समेकित प्रभाव राज्य को ‘ग्रीन हिमाचलÓ की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

वन आवरण में वृद्धि के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मदद मिल रही है। बजट 2026-27 में ‘मिशन 32 प्रतिशतÓ को केंद्र में रखना और वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अन्य कदम व नीतियां स्पष्ट करती हैं कि हिमाचल प्रदेश सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल न केवल वर्तमान आवश्यकताओं को संबल प्रदान कर रही है, बल्कि भविष्य की पीढिय़ों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण की नींव भी है।

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