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जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026: स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुपालन को युक्तिसंगत बनाना और छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना

नई दिल्ली। जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित हो चुका है।  यह देश में व्यापार करने में सुगमता और जीवन यापन में सुगमता को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह विधेयक सरकार की विश्वास-आधारित शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने और व्यक्तियों एवं व्यवसायों पर अनुपालन का बोझ कम करके उचित विनियमन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार 23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है। इनमें से 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाकर व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा दिया गया है।  67 प्रावधानों में जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए संशोधन किए गए हैं। कुल मिलाकर, विधेयक का उद्देश्य छोटे अपराधों को हटाकर 1,000 से अधिक अपराधों को तर्कसंगत बनाना है इससे नियामक वातावरण में सुधार हो और व्यवसायों और नागरिकों दोनों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार हो सके।

स्वास्थ्य क्षेत्र के भीतर संशोधनों में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940, फार्मेसी अधिनियम, 1948, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम; नैदानिक ​​प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010, और राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग अधिनियम, 2021 सहित प्रमुख कानून शामिल हैं। ये सुधार सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए अनुपालन को सरल बनाने के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप हैं।

इन सुधारों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि मामूली प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड, विशेष रूप से कारावास, को श्रेणीबद्ध मौद्रिक दंडों से प्रतिस्थापित किया गया है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्रभावित करने वाले गंभीर उल्लंघनों के लिए सख्त कार्रवाई को बरकरार रखते हुए, अधिक सुगम नियामक ढांचे की ओर एक बदलाव का संकेत देता है।

औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 में कई प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिसके तहत कारावास के स्थान पर आर्थिक दंड लागू किए गए हैं और एक सुव्यवस्थित न्यायनिर्णय तंत्र स्थापित किया गया है। विशेष रूप से, धारा 27ए(ii) और धारा 28ए के तहत उल्लंघनों के लिए न्यायनिर्णय तंत्र शुरू किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सौंदर्य प्रसाधनों (नकली या मिलावटी को छोड़कर) के मामले में मामूली उल्लंघनों के लिए न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी और इसके बजाय नागरिक दंड प्रणाली के माध्यम से उनका निपटारा किया जा सकेगा।

इसके अलावा दस्तावेज़ों का रखरखाव न करना या सूचना प्रस्तुत न करना जैसे उल्लंघन, जिन पर पहले न्यायालय द्वारा जुर्माना या कारावास लगाया जाता था, अब इस नागरिक दंड तंत्र के माध्यम से निपटाए जा सकते हैं। पहली बार, अधिनियम में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा न्यायनिर्णय प्राधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है, साथ ही कारण बताओ नोटिस जारी करने, व्यक्तिगत सुनवाई का प्रावधान और अपील तंत्र से संबंधित एक परिभाषित प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।

इस सुधार से अदालतों पर बोझ काफी कम होगा, मुकदमेबाजी की जटिलताएं कम होंगी और अनुपालन से जुड़े छोटे-मोटे मामलों का तेजी से समाधान संभव होगा। इससे विशेष रूप से सौंदर्य प्रसाधन उद्योग को लाभ होगा, क्योंकि इससे प्रक्रियात्मक चूक जैसे कि वैधानिक अभिलेखों या दस्तावेजों का रखरखाव न करना जैसे छोटे-मोटे उल्लंघनों का व्यवस्थित और पूर्वानुमानित तरीके से निपटारा हो सकेगा, जो अब लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी से मुक्त होंगे।

इसी प्रकार, फार्मेसी अधिनियम, 1948 में संशोधन का उद्देश्य दंड प्रावधानों को आधुनिक बनाना और गैर-अनुपालन के लिए वित्तीय दंड बढ़ाकर जवाबदेही बढ़ाना है। ये सुधार अद्यतन कानूनी ढांचों के अनुरूप भी हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत, प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए प्रावधानों को सरल बनाया गया है, साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि दंड अपराध की प्रकृति के अनुरूप हो। यह नियामक निरीक्षण और अनुपालन में सुगमता के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण का समर्थन करता है।

क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 को अद्यतन किया गया है ताकि अनुपालन न करने पर आर्थिक दंड का प्रावधान किया जा सके, विशेष रूप से उन मामलों में जहां कमियों से रोगी की सुरक्षा को तत्काल खतरा नहीं होता है। इससे आपराधिक कार्यवाही का सहारा लिए बिना सुधारात्मक कार्रवाई को प्रोत्साहन मिलता है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग अधिनियम, 2021 को पेशेवर मानकों और नियामक आवश्यकताओं के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए मजबूत किया गया है, जिसमें आनुपातिकता बनाए रखते हुए उल्लंघनों को रोकने के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।

स्वास्थ्य संबंधी अनेक कानूनों में इन सुधारों का एकीकरण नियामक ढाँचों में सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से अपनाए गए एक सुसंगत नीतिगत दृष्टिकोण को दर्शाता है। आपराधिक दंडों से नागरिक दंडों की ओर मानकीकरण और न्यायनिर्णय तंत्रों की शुरूआत के माध्यम से, ये संशोधन प्रवर्तन में निरंतरता, पूर्वानुमेयता और आनुपातिकता सुनिश्चित करते हैं। यह एकीकरण नियामक विखंडन को कम करता है, अनुपालन आवश्यकताओं को सरल बनाता है और स्वास्थ्य क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हितधारकों को स्पष्टता प्रदान करता है।

इन सुधारों को लागू करने में 23 मंत्रालयों की भागीदारी नियामक व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में सरकार के समग्र दृष्टिकोण को रेखांकित करती है। यह व्यापक भागीदारी सभी क्षेत्रों में व्यापार करने में सुगमता और जीवन यापन में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सुधार व्यापक, समन्वित और प्रभावी हों।

कुल मिलाकर, इन उपायों से अनुपालन में सुधार, मुकदमेबाजी में कमी और हितधारकों तथा नियामक अधिकारियों के बीच अधिक विश्वास पैदा होने की उम्मीद है, साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य और सार्वजनिक हित की रक्षा जारी रहेगी।

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