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प्रदेश सरकार ने हिमाचल में माइनिंग प्रभावित एरिया के दायरे को बढ़ा कर 15 किलोमीटर किया …

शिमला। जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) ट्रस्ट की बैठक आज यहां उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

उपायुक्त ने कहा कि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट एक महत्वपूर्ण संस्था है, जिसका गठन खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के कल्याण और विकास के लिए किया गया है। भारत सरकार ने खनिज और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2015 के तहत प्रत्येक खनन जिला में डीएमएफ ट्रस्ट स्थापित करने का प्रावधान किया है। इसी के तहत हिमाचल प्रदेश के खनन प्रभावित जिलों में भी डीएमएफ ट्रस्ट कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि अभी तक ट्रस्ट के पास 19 प्रस्ताव ही प्राप्त हुए हैं जोकि 67 लाख 91 हजार 739 रुपए की लागत के है। फरवरी 2026 तक ट्रस्ट के पास 2 करोड़ 84 लाख रुपए एकत्रित हुए है। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि सभी प्रस्तावों पर पुनर्विचार करके फील्ड वेरिफिकेशन अनिवार्य तौर पर करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने हिमाचल में माइनिंग प्रभावित एरिया के दायरे को बढ़ाया है। हिमाचल में जिस क्षेत्र में माइनिंग होती है वहां से प्रत्यक्ष तौर पर 15 किलोमीटर तक के एरिया को प्रभावित माना जाता है।

पहले यह एरिया केवल पांच किलोमीटर था। इसके अलावा अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र 15 से 25 किलोमीटर तक माना गया है। इन क्षेत्रों में सरकार डीएमएफ फंड को लोगों को पीने के पानी उपलब्ध करवाने, सिंचाई योजना और अन्य विकास कार्यों में खर्च करती है।

उन्होंने कहा कि डीएमएफ ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों का सामाजिक-आर्थिक विकास करना है। खनन कार्यों के कारण पर्यावरण, जल स्रोतों, कृषि भूमि तथा स्थानीय जीवन पर जो नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, उसकी भरपाई करने के लिए इस फाउंडेशन के माध्यम से विभिन्न विकासात्मक योजनाएं लागू की जाती हैं।

इस ट्रस्ट के लिए धनराशि मुख्य रूप से खनन कंपनियों और खनन पट्टाधारकों से प्राप्त होती है। खनिजों के उत्पादन पर निर्धारित प्रतिशत के अनुसार कंपनियों को डीएमएफ में योगदान देना होता है। यह राशि जिला स्तर पर बनाए गए ट्रस्ट में जमा होती है और उसी जिला के विकास कार्यों पर खर्च की जाती है।
डीएमएफ ट्रस्ट के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, आजीविका विकास तथा महिला और बाल कल्याण जैसे क्षेत्रों में योजनाएं संचालित की जाती हैं। खनन प्रभावित गांवों में स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण, पेयजल योजनाओं का विकास, वृक्षारोपण, कौशल विकास प्रशिक्षण तथा गरीब परिवारों की सहायता जैसे कार्य डीएमएफ के माध्यम से किए जाते हैं।

बैठक में एडीसी सचिन शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ यशपाल रांटा, जीएमडीआईसी संजय कंवर, जिला योजना अधिकारी निवेदिता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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