]> मिनी मैराथन, प्रदर्शनी और पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कारों के साथ जागरूकता अभियान; कचरा प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार पर सरकार का जोर
शिमला। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश पुलिस, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के सहयोग से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” रखी गई है।
विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर सचिव (पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) सुशील सिंगला (आईएफएस) ने बताया कि 5 जून को मनाया जाने वाला यह दिवस पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सामूहिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी की सुरक्षा केवल सरकारों या संस्थाओं की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि इस अवसर पर “स्वच्छ पर्यावरण और चिट्टा मुक्त जीवन के लिए दौड़ें” संदेश के साथ मिनी मैराथन-2026, पर्यावरणीय प्रबंधन की सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित प्रदर्शनी तथा पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कार समारोह का आयोजन किया जाएगा। मिनी मैराथन को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे, जबकि विजेताओं को मुख्यमंत्री सम्मानित करेंगे।
सिंगला ने कहा कि राज्य सरकार ठोस अपशिष्ट, ई-कचरा, जैव-चिकित्सा कचरा, खतरनाक कचरा तथा निर्माण एवं विध्वंस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत पुनर्चक्रणकर्ताओं और कचरा बीनने वालों सहित सभी हितधारकों को एक मंच पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे पुनर्चक्रण व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निपटान को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। औद्योगिक क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग और सार्वजनिक परिवहन में ई-वाहनों को बढ़ावा देने जैसे उपायों के परिणामस्वरूप राज्य का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) वर्ष 2016-17 के 81 के स्तर से सुधरकर 66 तक पहुंच गया है।
इसके अलावा विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों को स्थानीय स्तर पर स्कूल क्विज, पेंटिंग प्रतियोगिताएं, स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार की “एक पेड़ मां के नाम” पहल के तहत पूरे प्रदेश में विशेष वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाएगा, जिसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू किया जा रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों के बीच ऐसे जागरूकता कार्यक्रम लोगों की भागीदारी बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।















