आखिर यह कैसा रोस्टर! बीते 50 वर्षों में नहीं मिला पीरन पंचायत से दलित पुरूष को प्रधान बनने का मौका
शिमला। आगामी पंचायतीराज चुनावों के मध्यनजर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आरक्षण रोस्टर तैयार करने की अधिसूचना का कोली समाज कुसुमपटी निर्वाचन क्षेत्र ने स्वागत किया है। हालांकि सरकार ने इस बार नए सिरे से रोस्टर जारी करने का निर्णय लिया है अर्थात जो पंचायतें बीते दो टर्म में आरक्षित रही है उन्हें ओपन कर दिया जाएगा।
कोली समाज के अध्यक्ष शक्त राम कश्यप ने सरकार से अनुरोध किया है कि रोस्टर तैयार करते समय किसी प्रकार के राजनैतिक दबाव के चलते पक्षपात अथवा छेड़छाड़ न की जाए अपितु हर वर्ग को समान मौका दिया जाए। उन्होंने बताया कि रोस्टर के मुताबिक हर पांच वर्ष के उपरांत सभी वर्ग अर्थात सामान्य, सामान्य महिला वर्ग, अनुसूचित जाति वर्ग, अनुसूचित जाति महिला वर्ग, जनजाति और ओबीसी को क्रमवार मौका दिया जाना चाहिए।
उन्होंने पंचायत रोस्टर में पक्षपात का आरोप लगाते हुए बताया कि मशोबरा ब्लॉक की पीरन पंचायत में बीते 50 वर्षों में अनुसूचित जाति के पुरूष वर्ग को आजतक पंचायत प्रधान बनने का मौका नहीं मिला है जबकि इस पंचायत में वर्ष 2011 जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति वर्ग की जनसंख्या 57 प्रतिशत आंकी गई है।
उन्होंने कहा कि यह ऐसा कैसा रोस्टर है कि दलित पुरूष को पांच दशक में भी प्रधान बनने का मौका नहीं मिला। उन्होंने पंचायत रोस्टर भाई-भतीजावाद और राजनैतिक दबाव का भी आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1974 में पीरन पंचायत का गठन हुआ था।
बीते 50 वर्षों में से 40 वर्षों तक सामान्य वर्ग को प्रधान बनने का अवसर प्राप्त हुआ। हालांकि दो बार अनुसूचित जाति की महिलाएं अवश्य पंचायत प्रधान बनी परंतु पुरूष वर्ग को आजतक मौका नहीं मिल पाया। उन्होंने बताया कि पीरन पंचायत की तरह प्रदेश में न जाने कितनी ऐसी पंचायतें होगी जहां पर राजनैतिक दबाव के चलते रोस्टर के साथ छेड़छाड़ होती होगी।















