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कृषक हितैषी नीतियों का लाभ उठाएं किसान : संजीव गुलेरिया

मंडी। हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना चरण दो के अंतर्गत बीपीएमयू मंडी द्वारा विकसित ठंडी बावड़ी से भडयाल प्रवाह सिंचाई योजना का हस्तांतरण कार्यक्रम शनिवार को आयोजित किया गया। इस अवसर पर एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी के विकास सहायता कार्यालय के सहयोग से इस परियोजना का कार्य संपन्न किया गया। 

उन्होंने कहा कि यह सिंचाई योजना क्षेत्र में कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके तहत 50.76 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की गई है। इससे 209 किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। योजना को लगभग 98.41 लाख रुपये की लागत से स्वीकृति मिली थी, जबकि इसके निर्माण पर करीब 88.92 लाख रुपये व्यय किए गए। परियोजना के अंतर्गत 1812 मीटर मुख्य चैनल और 1309 मीटर वितरण चैनल का निर्माण किया गया है, जिससे खेतों तक पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।

संजीव गुलेरिया ने कहा कि यह सिंचाई उप-परियोजना किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और इससे क्षेत्र में कृषि को मजबूती मिलेगी। उन्होंने किसानों से योजना का अधिकतम लाभ उठाने तथा पारंपरिक खेती के साथ नकदी फसलों की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कृषि व पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण आर्थिकी को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जा रहा है और कृषि क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

इस दौरान मुख्य अतिथि ने सिंचाई योजना क्षेत्र का निरीक्षण कर खेतों में फसलों के प्रदर्शन का अवलोकन किया। उन्होंने आधुनिक तकनीकों को अपनाने और सब्जी उत्पादन में किसानों की पहल की सराहना करते हुए कहा कि बल्ह क्षेत्र पहले से ही सब्जी उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. हेमराज वर्मा ने किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक दवाइयों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। उन्होंने फसल विविधीकरण को अपनाने और कृषक विकास संघ को मजबूत बनाने पर बल देते हुए कहा कि संघ की नियमित बैठकें आयोजित कर एक सामूहिक फंड बनाया जाना चाहिए, ताकि बरसात या अन्य कारणों से कूहल को हुए नुकसान की समय पर मरम्मत की जा सके। योजना के रखरखाव की जिम्मेदारी भी केवीए की ही है और सामूहिक प्रयासों से इसे लंबे समय तक सफल बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में खंड परियोजना प्रबंधक डॉ. राजेश कुमार, कृषि विकास अधिकारी डॉ. हंसराज वालिया सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। 

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