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ये हैं राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता की प्रदेशहित की प्राथमिकताएं …

कविन्द्र गुप्ता ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल पद की शपथ ग्रहण की

शिमला। लोक भवन में आयोजित गरिमापूर्ण समारोह में आज कविन्द्र गुप्ता ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। कविन्द्र गुप्ता ने हिंदी में शपथ ग्रहण की।

इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष उनकी धर्मपत्नी मित्रा घोष, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू तथा लेडी गवर्नर बिन्दु गुप्ता भी उपस्थित थे।

लोक भवन में पहली बार समारोह का शुभारंभ वंदे मातरम् के गायन से हुआ जिसके बाद राष्ट्रगान गाया गया। शपथ ग्रहण समारोह के उपरान्त पुन: वंदे मातरम् गाया गया। इस अवसर पर राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।

इससे पहले मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट ऑफ अपॉइंटमेंट पढ़कर सुनाया। राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा ने राज्यपाल से कार्यभार ग्रहण प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करवाए।

समारोह में उप-मुख्यमंत्री श्री मुकेश अग्निहोत्री, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, आयुष मंत्री यादविन्द्र गोमा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, विधायकगण, हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, विभिन्न आयोगों, बोर्डों और निगमों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य, विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

शपथ ग्रहण समारोह से पूर्व आज प्रात: कविन्द्र गुप्ता ने परिजनों के साथ पूजा-अर्चना भी की।

इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से बातचीत भी की। इस संवैधानिक पद पर नियुक्त करने के लिए भारत के राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे संविधान के अनुसार कार्य करेंगे और राज्य सरकार के साथ समन्वय स्थापित करेगें। उन्होंने कहा, ‘राज्यपाल का पद एक संवैधानिक जिम्मेदारी है। राज्यपाल किसी राजनीतिक दल से संबंधित नहीं होता और राज्य तथा समाज के समग्र विकास के लिए कार्य करता है।Ó

गुप्ता ने कहा कि वे पूर्व राज्यपालों द्वारा शुरू किए गए नवाचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री तथा राज्य सरकार का सहयोग लेंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है और वे राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान देंगे।

लद्दाख के उप-राज्यपाल के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के समान हैं। उन्होंने कहा कि ‘लद्दाख में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सात महीनों में 10,000 किलोमीटर से अधिक यात्राएं की और वह पहाड़ी क्षेत्रों की चुनौतियों से भली-भांति परिचित हैं।Ó वह हिमाचल प्रदेश के लोगों के आतिथ्य भाव से अत्यंत प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने, विशेष रूप से राज्य में हरित क्षेत्र में विस्तार, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण तथा पर्यटन विशेषकर धार्मिक पर्यटन को मजबूत करने की दिशा में कार्य करेंगे। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और भारतीय मूल्यों को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी बल दिया।

उन्होंने कहा कि जनजातीय विकास, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, युवा कल्याण तथा नशा मुक्ति अभियान को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से राज्य के दूरदराज क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

राज्यपाल ने कहा कि नशामुक्त हिमाचल अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा, मूल्य आधारित सीख और काउंसलिंग जैसी पहलों को भी सशक्त बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए खेल गतिविधियों जैसे ‘खेलो इंडियाÓ को भी इन प्रयासों से जोड़ा जा सकता है।

गुप्ता ने चीन से लगते सीमा क्षेत्रों के विकास के महत्व पर भी बल देते हुए कहा कि राज्य में ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्रामÓ जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार, सत्तापक्ष और विपक्ष के साथ-साथ सामाजिक और स्वंयसेवी संगठनों के सहयोग से सामूहिक प्रयासों द्वारा हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे पहाड़ी राज्य को समावेशी और सतत विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा।

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