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स्कूली छात्रों के लिए शुरू किए गए अंतरिक्ष संबंधी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी

नई दिल्ली। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम (युविका) जैसी समावेशी और भविष्योन्मुखी पहलों के माध्यम से स्कूली छात्रों में वैज्ञानिक सोच को व्यवस्थित रूप से पोषित कर रही है, जिससे देश भर के ग्रामीण, वंचित और महत्वाकांक्षी युवाओं को समान अवसर मिल सकें।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए, रायगा कृष्णाया द्वारा उठाए गए तारांकित प्रश्न के साथ-साथ नीरज डांगी, डॉ. परमार जसवंतसिंह सलामसिंह और राजथी द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों के उत्तर में, मंत्री ने युविका कार्यक्रम की रूपरेखा, पहुंच और प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2019 में शुरू की गई युविका एक अनूठी पहल है जिसका उद्देश्य कक्षा 9 के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी से प्रारंभिक अवस्था में ही परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को इस तरह से संरचित किया गया है कि लोकतांत्रिक और समान भागीदारी सुनिश्चित हो सके, जिसमें प्रत्येक राज्य से 10 और प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश से 8 विद्यार्थियों का वार्षिक चयन किया जाता है, जिससे संतुलित क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बना रहता है।

समावेशिता पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि चयन मानदंडों में ग्रामीण छात्रों को विशेष महत्व दिया गया है, जिसमें पंचायत स्तर के विद्यालयों के छात्रों को 15% वरीयता शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि चयन प्रक्रिया व्यापक है, जिसमें प्रश्नोत्तरी प्रदर्शन, विज्ञान मेलों में भागीदारी, ओलंपियाड और राष्ट्रीय सामाजिक सेवा (एनएसएस) और स्काउट्स जैसी पाठ्येतर गतिविधियों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे छात्रों का समग्र मूल्यांकन सुनिश्चित होता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सहभागिता का विवरण देते हुए बताया कि अब तक पांच संस्करणों में 1,320 छात्र इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो चुके हैं। कोविड-19 महामारी के कारण 2020 और 2021 में कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सका। हालांकि, हाल के वर्षों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है और प्रतिवर्ष लगभग 350 छात्रों का चयन किया जा रहा है, जो इसकी बढ़ती पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।

मंत्री जी ने आगे बताया कि युविका कार्यक्रम ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान एक महीने का आवासीय कार्यक्रम है, जिसमें चयनित छात्र इसरो के प्रमुख केंद्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, वैज्ञानिकों से बातचीत करते हैं और अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों से परिचित होते हैं। वर्तमान में, यह कार्यक्रम सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा), विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (तिरुवनंतपुरम) और अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (अहमदाबाद) सहित सात प्रमुख केंद्रों में संचालित किया जा रहा है। क्षमता को और बढ़ाने के लिए महेंद्र गिरि (तमिलनाडु) और जोधपुर (राजस्थान) में दो अतिरिक्त केंद्र जोड़े जा रहे हैं।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कार्यक्रम की पहुंच और जागरूकता से संबंधित चिंताओं को दूर करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि यह कार्यक्रम समावेशी है और इसमें सरकारी स्कूलों सहित केंद्रीय और राज्य दोनों बोर्डों के छात्र शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रव्यापी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं, विज्ञान मेलों और जिला एवं राज्य स्तर पर शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता और भागीदारी को बढ़ावा दिया जाता है।

वैज्ञानिक प्रतिभाओं के पोषण के लिए विकसित किए जा रहे व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने विज्ञान ज्योति जैसी पूरक पहलों का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य कक्षा 9 से 12 तक की लड़कियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, और विभिन्न करियर चरणों में महिलाओं का समर्थन करने वाले अन्य फैलोशिप कार्यक्रमों का भी जिक्र किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की तीव्र विकास पर भी जोर दिया और बताया कि यह एक मामूली आधार से बढ़कर लगभग 9 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया है, और अनुमान है कि 2033 तक यह 44 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत द्वारा किए गए 90% से अधिक विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण पिछले दशक में हुए हैं, जो इस क्षेत्र में किए गए परिवर्तनकारी सुधारों को दर्शाते हैं।

मंत्री जी ने अपने संबोधन का समापन यह कहते हुए किया कि युविका जैसी पहल न केवल भविष्य के वैज्ञानिकों की एक मजबूत श्रृंखला का निर्माण कर रही है, बल्कि 2047 तक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और नवाचार में वैश्विक नेता बनने के भारत के दीर्घकालिक दृष्टिकोण में भी योगदान दे रही है।

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