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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) ने लघु और सूक्ष्म उद्यमियों को सशक्त बनाने के 11 वर्ष पूर्ण किए

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 8 अप्रैल, 2015 को शुभारंभ की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) भारत के जमीनी स्तर के उद्यमियों को सशक्त बनाने में 11 वर्षों की सफलता का उत्सव मना रही है। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय पहुंच में वर्तमान अंतर को कम करना है, जिसके अंतर्गत गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि आय सृजन गतिविधियों के लिए लघु व्यवसायों को समर्थन देने हेतु 20 लाख रुपये तक के सरल, आसान और बिना गारंटी वाले ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) औद्योगिक इकोसिस्टम का आधार हैं और यह प्रमुख निगमों के लिए आवश्यक भागीदार के रूप में कार्य करते हुए संतुलित आर्थिक विकास को गति प्रदान करते हैं। नए उद्योगों में विस्तार और उत्पादन में सुधार करके, ये उद्यम स्थानीय उपभोक्ताओं और वैश्विक बाजारों दोनों की आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा कर रहे हैं।

डिजिटल नवाचारों और डेटा एनालिटिक्स की सहायता से छोटे व्यवसायों के लिए पूंजी जुटाना आसान हो गया है, जिससे व्यावसायिक वित्तपोषण का परिदृश्य तेजी से विकसित हुआ है। इस प्रगति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पीएमएमवाई है, जो एक रणनीतिक सरकारी पहल है और यह “वित्तपोषितों को वित्तपोषित करना” के अपने मिशन के लिए जानी जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऋण उन लोगों तक पहुंचे जो पारंपरिक रूप से औपचारिक बैंकिंग प्रणालियों से वंचित रहे हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के 11वें सफल वर्ष के अवसर पर, केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले दशक में, भारत ने एक ऐसा परिवर्तन देखा है जहां करोड़ों आम नागरिकों ने नए आत्मविश्वास और सक्रियता के साथ उद्यमशीलता के क्षेत्र में कदम रखा है। इसके केंद्र में प्रधानमंत्री द्वारा 8 अप्रैल, 2015 को शुभारंभ की गई एक पहल, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) है, जिसका उद्देश्य ‘वित्तपोषित न होने वाले क्षेत्रों को वित्तपोषित करना’ था।”

श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि 11 बाद, यह योजना देश में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और अनगिनत व्यक्तिगत उद्यमियों के लिए ऋण परिदृश्य को नया रूप देने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है। ये वही उद्यमी हैं जो अब तक औपचारिक बैंकिंग प्रणाली के परिदृश्य बाहर थे। इस पहल से, ऋण तक पहुंच की बाधाओं को हटाकर उद्यमिता का सही मायने में लोकतंत्रीकरण हुआ है।

लाखों लोगों को सशक्त बनाने और समावेशी विकास के दृष्टिकोण को साकार करने में पीएमएमवाई की भूमिका का उल्लेख करते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि कुल मिलाकर 57.79 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनकी कुल राशि 40.07 लाख करोड़ रुपये है। इनमें से दो-तिहाई ऋण महिला उद्यमियों को स्वीकृत किए गए हैं। लगभग एक-पांचवां हिस्सा पहली बार उद्यम शुरू करने वाले उद्यमियों को दिया गया है। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो, नए उद्यमियों को 12 लाख करोड़ रुपये की राशि के साथ 12.15 करोड़ ऋण दिए गए हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस योजना को आम आदमी तक पहुंचाने और इसे शानदार सफलता दिलाने के लिए बैंकों, विभिन्न वित्तीय संस्थानों और हितधारकों की सराहना भी की।

श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि पीएम मुद्रा योजना उद्यमियों को सशक्त बनाना जारी रखेगी ताकि वे 2047 तक विकसित भारत बनने की हमारी राष्ट्र की यात्रा में सक्रिय भागीदार बन सकें।

इस अवसर पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) सूक्ष्म उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक है। वित्तीय समावेशन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है, क्योंकि यह समावेशी विकास हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पीएमएमवाई छोटे उद्यमियों को बैंकों, गैर-सरकारी वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) और लघु एवं शिशु वित्त संस्थानों (एमएफआई) से ऋण सहायता प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान करता है, जिससे ऋण समावेशन को बढ़ावा मिलता है।

राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने कहा कि मुद्रा योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 8 अप्रैल, 2015 को किया था। योजना का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत के लघु उद्यमियों का समर्थन करना भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास और समृद्धि में सहायक सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। इस योजना ने बड़ी संख्या में उद्यमियों को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे उन्हें अपना व्यवसाय स्थापित करने और संचालित करने में मदद मिली है और उनमें वित्तीय सुरक्षा की भावना जागृत हुई है।

श्री पंकज चौधरी ने कहा कि इसने पूरे देश में, विशेष रूप से समाज के वंचित वर्गों, जिनमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ऋण लाभार्थियों का 51%) और महिलाएं (ऋण लाभार्थियों का 67%) शामिल हैं, के लिए स्वरोजगार के अवसरों का सृजन किया है।

मुद्रा योजना के प्रभाव पर बल देते हुए राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने कहा कि मुद्रा योजना का मूल उद्देश्य ‘वित्तपोषितों को वित्तपोषित करना’ है। इस योजना ने अनौपचारिक ऋणदाताओं द्वारा भारत के छोटे उद्यमियों के शोषण को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है। पिछले 11 वर्षों में, इसने 57.7 करोड़ ऋणों के माध्यम से 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण दिया है, जिससे ऋण प्राप्त कर्ताओं में नए सिरे से विश्वास जगा है। यह स्पष्ट रूप से उनके प्रयासों का समर्थन करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता और वित्तीय समावेशन द्वारा सक्षम समावेशी विकास के माध्यम से 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सरकार की तीव्र प्रगति को दर्शाता है।

पीएमएमवाई की प्रमुख विशेषताएं:

  1. मुद्रा ऋण चार श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं, जिनका नाम है ‘शिशु’, ‘किशोर’, ‘तरुण’ और ‘तरुणप्लस’, जो ऋण प्राप्तकर्ताओं की विकास या वृद्धि के चरण और वित्तपोषण आवश्यकताओं को दर्शाती हैं:
    • शिशु: 50,000 रुपये तक के ऋण को कवर करता है।
    • किशोर: 50,000 रुपये से अधिक और 5 लाख रुपये तक के ऋणों को कवर करता है।
    • तरुण: 5 लाख रुपये से अधिक और 10 लाख रुपये तक के ऋणों को कवर करता है।
    • तरुणप्लस: 10 लाख रुपये से अधिक और 20 लाख रुपये तक के ऋणों को कवर करता है।
  2. ऋण विनिर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्रों में सावधि वित्तपोषण और कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करते हैं, जिसमें कृषि से संबंधित गतिविधियां जैसे मुर्गी पालन, डेयरी और मधुमक्खी पालन आदि शामिल हैं।
  3. ब्याज दर आरबीआई के दिशानिर्देशों द्वारा निर्धारित की जाती है, जिसमें आसान पुनर्भुगतान शर्तें उपलब्ध हैं।

27 मार्च 2026 तक प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के अंतर्गत उपलब्धियां

महिला ऋण प्राप्तकर्ता : शिशु श्रेणी के अंतर्गत कुल 9.02 लाख करोड़ रूपए, किशोर श्रेणी के तहत 6.22 लाख करोड़ रूपए और तरुण श्रेणी के तहत 1.09 लाख करोड़ रूपए का ऋण वितरित किया गया।

अल्पसंख्यक ऋण प्राप्तकर्ता : शिशु योजना के तहत 1.33 लाख करोड़ रूपए, किशोर योजना के तहत 1.54 लाख करोड़ रूपए और तरुण योजना के तहत 0.62 लाख करोड़ रूपए का वितरण किया गया।

नए उद्यमी/खाते:

शिशु श्रेणी: 8.80 करोड़ खाते, जिनमें से 2.47 लाख करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है और 2.42 लाख करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है।

किशोर श्रेणी: 2.79 करोड़ खाते जिनमें 5.09 लाख करोड़ रूपए स्वीकृत और 4.87 लाख करोड़ रूपए वितरित किए गए हैं।

तरुण श्रेणी: 55 लाख खाते जिनमें 4.82 लाख करोड़ रूपए की स्वीकृत राशि और 4.67 लाख करोड़ रूपए का वितरण किया जा चुका है।

पीएमएमवाई के एक दशक से अधिक समय पूरे होने पर, भारत वंचित वर्गों के लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने के अपने समर्पित मिशन पर बल देता है। “बैंकिंग से वंचितों को बैंकिंग सुविधा प्रदान करना”, “असुरक्षितों को सुरक्षा प्रदान करना” और “वित्तपोषित न होने वालों को वित्तपोषित करना” के मूल सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, सरकार वित्तीय अंतर को पाटने और महत्वाकांक्षी व्यवसाय स्वामियों की आकांक्षाओं को वास्तविकता में परिवर्तित करने का प्रयास जारी रखे हुए है।

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