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रोहित ठाकुर ने शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार लाने तथा जवाबदेही तय करने के दिए निर्देश

शिमला। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां विद्यालय शिक्षा (माध्यमिक, प्रारंभिक एवं गुणवत्ता प्रकोष्ठ) के उप-निदेशकों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का उद्देश्य राज्य भर में शैक्षणिक स्तर, प्रशासनिक कार्यकुशलता तथा विद्यालयों के समग्र प्रदर्शन का आकलन करना था। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षण परिणामों में सुधार सुनिश्चित करने की सीधी जिम्मेदारी उप-निदेशकों की है।

उन्होंने समग्र शिक्षा के अंतर्गत जारी धनराशि का समयबद्ध एवं परिणामोन्मुख उपयोग करने के निर्देश दिए तथा 31 मार्च, 2026 तक पूर्ण व्यय सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसाधनों का उपयोग सीधे तौर पर कक्षा स्तर पर दिखाई देने वाले सुधारों में परिलक्षित होना चाहिए और इसके लिए उप-निदेशक स्तर पर जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने उप-निदेशकों से निरंतर तौर पर फील्ड विजिट कर विद्यालयों में किए जा रहे पठन-पाठन से संबंधित कार्यों और सुधारों के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। 

बैठक में विशेषकर विलय किए गए विद्यालयों में युक्तिकरण की भी विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि विलय के बाद खाली हुए भवनों को निष्क्रिय न छोड़ा जाए, बल्कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार उन्होंने विलय किए गए विद्यालयों के भवनों का व्यापक जनहित में प्रभावी एवं सुव्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इन परिसरों का पंचायतों के साथ समन्वय स्थापित कर सामुदायिक उपयोग में लाया जाए अथवा आवश्यकता अनुसार आंगनवाड़ी केंद्रों एवं अन्य शासकीय विभागों को हस्तांतरित किया जाए। इस व्यवस्था से सार्वजनिक संपत्तियों का सर्वोत्तम एवं सार्थक उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के बीच प्रशासनिक बाधाओं को समाप्त करने पर बल दिया, ताकि उपलब्ध प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, खेल मैदानों एवं शिक्षण स्टाफ का साझा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। 

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान और वाणिज्य संकाय के युक्तिकरण की भी समीक्षा की गई। राज्य के 1,970 विद्यालयों में से 818 में विज्ञान तथा 799 में वाणिज्य संकाय संचालित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से उपलब्ध संकाय और आधारभूत संरचना का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

शिक्षा मंत्री ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत परीक्षाओं की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि विलय किए गए सरकारी विद्यालय बोर्ड परीक्षा केंद्र के रूप में कार्य करेंगे तथा प्रधानाचार्यों को केंद्र समन्वयक नियुक्त कर परीक्षा संचालन की निष्पक्षता और सुचारु व्यवस्था के लिए उत्तरदायी बनाया जाएगा। सभी परीक्षा कक्षों में लाइव मॉनिटरिंग सहित सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य किए गए हैं तथा पूर्व में चिन्हित संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही विभागीय आंकड़ों की रियल-टाइम निगरानी के लिए एक सशक्त डिजिटल प्रणाली विकसित करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि कुछ निजी विद्यालयों द्वारा सीबीएसई संबद्ध संस्थानों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को समय पर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) जारी न करने का मामला अत्यंत गंभीर है। उन्होंने ऐसे मामलों का निर्धारित समयसीमा में समाधान करने के निर्देश दिए ताकि किसी भी विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित न हो। इस संबंध में उन्होंने उप-निदेशकों को आवश्यक हस्तक्षेप कर उचित कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सीबीएसई संबद्धता के उपरांत की प्रक्रियाओं, उप-श्रेणी पात्रता तथा लंबित भर्तियों से संबंधित मामलों की भी समीक्षा कर शीघ्र समाधान के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक के निरीक्षण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने समय पर पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। एमआईएस रिपोर्टिंग, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण, आयरन फोलिक एसिड एवं डीवॉर्मिंग गोलियों के वितरण तथा पीएम पोषण योजना के अंतर्गत मध्यान्ह भोजन की स्वचालित निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया गया, ताकि जमीनी स्तर पर जवाबदेही बढ़ाई जा सके।

विद्यार्थियों के समग्र विकास पर बल देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार खेल एवं सह-पाठयक्रम गतिविधियांे पर विशेष बल दे रही है। वर्ष 2025-26 में राज्य ने ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त करते हुए 121 खिलाड़ियों ने 48 राष्ट्रीय पदक जीते, जिनमें अंडर-14 वर्ग में भी 14 पदक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा खिलाड़ियों के लिए 1,22,85,000 रुपये की डाइट मनी स्वीकृत की गई है जिसे शीघ्र ही जारी कर दिया जाएगा और खिलाड़ियों को पौष्टिक भोजन सुनिश्चित होगा। उन्होंने चरणबद्ध तरीके से खेल छात्रावासों के विस्तार और संचालन के लिए चरणबद्ध तरीके से सुदृढ़ निगरानी तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यालयों में सांस्कृतिक गतिविधियों, वाद-विवाद, विज्ञान प्रदर्शनियों तथा अन्य सह-पाठयक्रम कार्यक्रमों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने को कहा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा विकसित समग्र प्रगति कार्ड रूपरेखा का पायलट आधार पर विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि व्यापक मूल्यांकन प्रणाली को अपनाते हुए शिक्षकों के कार्यभार को कम किया जा सके। उन्होंने पदोन्नत प्रधानाचार्यों की नेतृत्व एवं प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए इंडक्शन प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश भी दिए।

शिक्षा मंत्री ने विद्या समीक्षा केंद्रों की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल निगरानी के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने बेहतर शैक्षणिक परिणामों के लिए डेटा विश्लेषण को और सुदृढ़ करने तथा बोर्ड परीक्षाओं के लिए ‘अभ्यास’ मॉड्यूल में जिलों की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने चंबा जिले में लागू की गई सफल परीक्षा तैयारी पहलों को अन्य जिलों में भी अपनाने का आह्वान किया।

बैठक के दौरान पीएम श्री विद्यालय, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की डिजिटल उपस्थिति तथा निःशुल्क जेईई एवं नीट कोचिंग कार्यक्रम पर प्रस्तुतियां दी गईं। 

शिक्षा सचिव राकेश कंवर, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, सभी जिलों के उप-निदेशक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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