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असहाय एवं आश्रयहीन बच्चों के संरक्षण के लिए सजग रहने की आवश्यकता : कृतिका कुलहरी

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सोलन : उपायुक्त कार्यालय के सभागार में आज जि़ला स्तरीय बाल संरक्षण समिति की त्रैमासिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त सोलन कृतिका कुलहरी ने की। कृतिका कुलहरी ने कहा कि असहाय एवं आश्रयहीन बच्चों के संरक्षण के प्रति पूरे समाज को सजग रहने की नितांत आवश्यकता है तभी हम उनका असामाजिक तत्वों से बचाव व संरक्षण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सोलन जि़ला में चाइल्ड हेल्पलाईन नम्बर से अभी तक 264 बच्चों को सहायता प्रदान की गई है। यह योजना एकीकृत बाल संरक्षण योजना केन्द्रीय प्रायोजित योजना है। इस योजना का उद्देश्य सरकार एवं समाज की भागीदारी के माध्यम से कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों के साथ अन्य कमजोर बच्चों के लिए सुरक्षात्मक वातावरण का निर्माण करना है।
उपायुक्त ने कहा कि असामाजिक तत्वों के लिए बच्चे बेहद आसान लक्ष्य होते हैं। असामाजिक तत्व विभिन्न अवांछनीय गतिविधियों के लिए असहाय एवं आश्रयहीन बच्चों की तलाश करते हैं। बच्चों को ऐसे तत्वों से बचाने के लिए पूरे समाज का जागरूक होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस अथवा बाल संरक्षण इकाई को दी जानी चाहिए ताकि समय रहते उचित कार्रवाई कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उपायुक्त ने किशोर श्रम अधिनियम-1986 के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बाल श्रम पूरी तरह निषेध है। पारिवारिक व्यवसाय में बच्चों से तभी कार्य लिया जा सकता है यदि इससे उनकी शिक्षा बाधित न होती हो। किसी भी बच्चे से 5 घंटे से अधिक कार्य नहीं करवाया जा सकता है तथा 3 घंटे के कार्य के उपरांत विश्राम अनिवार्य है। उन्होंने जानकारी दी कि सायं 07.00 बजे से प्रात: 08.00 बजे तक असहाय व आश्रयहीन बच्चों से कार्य लेना अपराध है। उन्होंने श्रम विभाग को निर्देश दिए कि बाल श्रम की कुप्रथा को समाप्त करने के लिए जि़ला में स्थापित विभिन्न उद्योगों का नियमित निरीक्षण किया जाए। उन्होंने नि:शुल्क हेल्पलाइन नम्बर 1098 पर बच्चों के सम्बन्ध में प्राप्त कॉल पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विद्यालय में प्रभात सभा तथा स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक के दौरान बच्चों को बैड टच तथा गुड टच के बारे में जानकारी प्रदान की जाए।
कृतिका कुलहरी ने भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम 1979 की जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि बच्चे राष्ट्र की संपत्ति हैं और उनका संरक्षण हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि वन स्टॉप सेंटर में एक छत के नीचे घरेलू हिंसा से पीडि़त बच्चियों व महिलाओं को पुनर्वास सुविधा, चिकित्सा सुविधा इत्यादि प्रदान की जाती है।
बैठक में जानकारी दी गई कि जि़ला सोलन में देखभाल, सहायता और पुनर्वास सेवाओं के अंतर्गत शांति निकेतन चिल्ड्रन होम थेथोंग सुबाथू में 83 बच्चे, अर्की स्थित बाल आश्रम टुटीकंडी में 22 बच्चे तथा खुला आश्रय कथेड़ में 08 बच्चों को संस्थागत सेवाओं, सहित गैर संस्थागत सेवाएं प्रदान की जा रही है। जि़ला के क्षेत्रीय चिकित्सालय सोलन सहित जि़ला के कुनिहार, अर्की, दाड़लाघाट, नालागढ़ और परवाणू स्वास्थ्य संस्थानों में शिशु केन्द्र स्थापित किए गए है।
बैठक में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष कमल वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजन उप्पल, जि़ला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस राजेंद्र कुमार नेगी, जि़ला बाल संरक्षण अधिकारी सुरेंद्र तेगटा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी तथा जिला कल्याण समिति के सदस्यों ने भाग लिया।